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मनाली में कचरा प्रबंधन पर हाईकोर्ट सख्त, अधिकारियों को किया तलब

मनाली में कचरा निपटान व्यवस्था पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
ब्यास नदी में बिना ट्रीटमेंट जहरीला पानी बहाने पर लाखों का जुर्माना
नगर परिषद मनाली के ईओ और निजी कंपनी प्रतिनिधि को कोर्ट में तलब


हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मनाली के रंगरी क्षेत्र में ठोस कचरे और दशकों पुराने लीगेसी वेस्ट के वैज्ञानिक तरीके से निपटान न होने पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने नगर परिषद मनाली और कचरा प्रबंधन से जुड़ी निजी कंपनी सनटैन लाइफ प्राइवेट लिमिटेड की कार्यप्रणाली को बेहद दयनीय करार देते हुए अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने की। अदालत ने नगर परिषद मनाली के अधिशासी अधिकारी और कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए हैं।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि नगर परिषद मनाली के पास गीले कचरे के उपचार की कोई स्थानीय व्यवस्था नहीं है। मनाली से गीला कचरा करीब 300 किलोमीटर दूर अंबाला के जाटवार स्थित बायोगैस प्लांट में भेजा जा रहा है। अदालत ने कहा कि इतनी लंबी दूरी तक गीले कचरे को खुले परिवहन में ले जाने से पूरे हाईवे पर प्रदूषण फैलने का खतरा बना रहता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमों के तहत कचरे को स्रोत पर ही गीले और सूखे हिस्सों में अलग करना अनिवार्य है, लेकिन मनाली में इस व्यवस्था का पालन नहीं हो रहा।

अदालत के सामने पेश निरीक्षण रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि प्लांट को प्रतिदिन मिलने वाले कुल 28.78 टन कचरे में से 24.62 टन कचरा मिश्रित होता है। यानी करीब 85 प्रतिशत कचरा बिना अलग किए ही भेजा जा रहा है, जबकि केवल 15 प्रतिशत कचरा ही पृथक रूप से एकत्र किया जा रहा है। कोर्ट ने इसे पर्यावरणीय नियमों का गंभीर उल्लंघन माना।

निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि कचरे से निकलने वाला जहरीला और बदबूदार पानी यानी लीचेट बिना किसी उपचार के सीधे ब्यास नदी में बहाया जा रहा था। इसके अलावा गो सदन के पास खुले में कचरा फेंका गया था, जिससे आसपास के क्षेत्र में प्रदूषण और दुर्गंध फैल रही थी। अदालत ने इसे बेहद गंभीर मामला मानते हुए नगर परिषद मनाली पर ब्यास नदी को प्रदूषित करने के आरोप में 15 लाख 30 हजार रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाया है।

यही नहीं, ठोस कचरे के अवैज्ञानिक तरीके से निपटान के लिए नगर परिषद पर 2 करोड़ 83 लाख 7 हजार 591 रुपये का अतिरिक्त भारी जुर्माना भी लगाया गया है। हाईकोर्ट ने नगर परिषद और संबंधित कंपनी से पूछा है कि उन्होंने अब तक यह जुर्माना राशि जमा क्यों नहीं कराई। अदालत ने दोनों पक्षों को विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि लीगेसी वेस्ट और मौजूदा कचरे के वैज्ञानिक निपटान के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और आगे की कार्ययोजना क्या है।

हालांकि सुनवाई के दौरान निजी कंपनी की ओर से दलील दी गई कि गीले कचरे के उपचार के लिए दो अतिरिक्त शेड का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इसके बावजूद अदालत ने मौजूदा हालात को लेकर असंतोष जाहिर किया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी, जहां नगर परिषद और कंपनी को अदालत के सामने जवाब देना होगा।